जापान में परमाणु हमले के बाद हुई थी काली बारिश, पीड़ितों को अब मिला इंसाफ

जापान की एक अदालत ने साल 1945 में हिरोशिमा में हुए परमाणु हमले के बाद हुई काली बारिश के पीड़ितों को मान्यता दी है. अदालत ने आदेश दिया है कि बम हमले के के दूसरे पीड़ितों की तरह उन्हें भी सरकारी इलाज की सुविधा का लाभ मिले.

कोर्ट ने कहा कि चिन्हित इलाके से बाहर रहने वाले 84 शिकायतकर्ता भी रेडियोधर्मी विकिरण से प्रभावित हुए थे और इसी वजह से उन्हें भी परमाणु हमला पीड़ितों के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए. आपको बता दें कि इस मामले में अधिकतर याचिकाकर्ताओं की उम्र 70 साल से अधिक हो चुकी है और कुछ तो 90 साल तक के हैं.

गौरतलब है कि अमेरिका ने जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी में सेकेंड वर्ल्डवॉर के दौरान परमाणु हमला किया था. अब इस घटना को 75 साल पूरे होने वाले हैं और इससे पहले ये फैसला आया है.

अमेरिका ने छह अगस्त 1945 को हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया था जिसमें करीब एक लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. इस धमाके से पूरा शहर बर्बाद हो गया था. इसके बाद 9 अगस्त को नागासाकी पर हमला किया गया था और ये धमाका पहले वाले धमाके से भी अधिक बड़ा था.

अब जापान की एक अदालत ने माना है कि बम गिराए जाने के बाद एक रेडियोएक्टिव बारिश हुई थी जिसमें याचिकाकर्ता बीमार हो गए थे. इनमें से कुछ लोगों को कैंसर हो गया तो कुछ की आखों की रौशनी चली गई थी.

धमाके के प्रभाव से इलाके की जमीन और पानी तक भी रेडियोएक्टिविटी की चपेट में आ गया था. अब कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि अपील करने वाले सभी 84 वादियों को वो सभी चिकित्सा संबंधी सुविधाएं दी जाएं जो हमले के पीड़ितों को दी जाती हैं.

सेकेंड वर्ल्डवॉर के दौरान अमेरिका द्वारा किए उस हमले के पीड़ितों को हिरोशिमा में स्थानीय लोग “हिबाकुशा” कहते हैं. जब युद्ध खत्म हो गया तो जापान की सरकार ने कुछ इलाकों को बेहद प्रभावित क्षेत्र घोषित किया था और उस वक्त जो लोग वहां रह रहे थे उन्हें फ्री इलाज देने की घोषणा की थी.

ये 84 लोग उस इलाके से बाहर रह रहे थे जिसको प्रभावित क्षेत्र घोषित किया गया था लेकिन हमले के बाद काली बारिश की चपेट में आ गए थे. इन लोगों ने कोर्ट में कहा था कि इन पर भी बारिश का ठीक वैसा ही प्रभाव हुआ था जैसा प्रभावित क्षेत्र के लोगों पर हुआ था.

इनकी तमाम दलीलें सुनने के बाद जज ने अपने फैसले में कहा कि इन लोगों की मेडिकल हिस्ट्री से साफ पता चलता है कि इन लोगों को भी वैसी ही बीमारियों का सामना करना पड़ा जैसा प्रभावित क्षेत्र के लोगों को करना पड़ा. वैसे तो जापान में बुजुर्गों को इलाज के लिए केवल खर्च का 10 प्रतिशत ही देना होता है लेकिन इस केस के पीड़ितों के लिए एक प्रतीकात्मक जीत है.

जैसे ही फैसला सुनाया गया, तमाम वादी और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई. एक शख्स ने कोर्ट से बाहर निकलने के बाद बैनर लहराया जिस पर लिखा था संपूर्ण विजय. इन लोगों को पैसे या इलाज से अधिक कष्ट इस बात का था कि सालों तक इनको ये बात साबित करनी पड़ी कि इन्होंने भी वही कष्ट झेले हैं जो हिरोशिमा और नागासाकी के पीड़ितों ने झेले हैं.

यहां ये फैक्ट भी महत्वपूर्ण है कि मार्च 2020 तक जापान की सरकार ने 1,36,682 लोगों को परमाणु हमला पीड़ितों के रूप में मान्यता दी हुई थी. इनमें नागासाकी में रहने वाले लोग भी शामिल हैं जहां करीब 74 हजार लोग हमले के वक्त मारे गए थे.

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक एटम बम विस्फोट से जो बादल बने थे उनके कारण हिरोशिमा में तेज बारिश हुई थी जिसमें गंदगी, धूल और विस्फोट से उत्पन्न हुए रेडियोएक्टिव तत्व मौजूद थे.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ये बारिश काले रंग से भी गहरी बारिश थी जो ग्रीस के जैसी थी. इस बारिश की बूंदें बहुत बड़ी बड़ी थीं और बहुत भारी भी थीं. इस बारिश के कारण लोगों के शरीर से खाल उतर गई थी, पिघल गई थी और लोग बुरी तरह जल गए थे.

ऐसा भी माना जाता है कि विस्फोट के एक किलोमीटर तक के दायरे की हर चीज करीब करीब भाप बन गई थी और ये काली बारिश उसी भाप के कारण हुई थी. साल 1945 में एक अध्ययन किया गया था जिसमें पता चला कि ग्राउंड ज़ीरो से तकरीबन 29 किलोमीटर के क्षेत्र में काली बारिश हुई थी.

हालांकि ये बारिश और इसका असर हिरोशिमा पर अधिक हुई लेकिन नागासाकी में काफी कम. जापान की सरकार ने जो जांच की उससे पता चला है कि प्रभावित क्षेत्र से करीब 4 गुना अधिक जगह काली बारिश की चपेट में आई थी.