जानिए क्या है एपीडेमिक डिज़ीज़ एक्ट जिसे अब इस्तेमाल कर रही है सरकार

आपको पता है कि देश में कई इलाकों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है यानि ये इलाके लॉकडाउन वाली स्थिति में पहुंच गए हैं. लखनऊ में भी कई इलाकों को पूरी तरह बंद करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं. क्या आप जानते हैं ऐसा किस एक्ट के तहत किया गया है? चलिए आपको बताते हैं एपीडेमिक डिज़ीज़ एक्ट के बारे में.

सबसे पहले आपको जानना होगा कि आखिर ये एपीडेमिक होता क्या है? दरअसल बीमारियों को तीन तरह से बांटा जाता है. एंडेमिक, एपीडेमिक और पैनडेमिक. एंडेमिक शब्द का इस्तेमाल तब किया जाता है जब बीमारियां किसी खास इलाके में ही फैलती हैं. एपीडेमिक शब्द का इस्तेमाल तब किया जाता है जब बीमारियां किसी इलाके में बहुत तेजी से फैलती हैं और अपने क्षेत्र को भी बढाती हैं लेकिन पैनडेमिक तब इस्तेमाल किया जाता है जब बीमारियां ना केवल बहुत तेजी से फैलती हैं बल्कि अपने क्षेत्र को भी बहुत तेजी से बढ़ाती हैं.

कोरोना वायरस को पैनडेमिक यानि महामारी इसलिए कहा गया है क्योंकि ये बीमारी 150 से अधिक देशों में फैल चुकी है. ढाई लाख से अधिक लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं और 10 हजार से अधिक लोग इस बीमारी के कारण अपनी जान गवां चुके हैं. भारत में भी कोरोना वायरस के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं. अभी तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन सरकार इस आंकडे को बढ़ते नहीं देखना चाहती और इसीलिए स्थानीय स्तर पर एपीडेमिक डिजीज एक्ट का सहारा लिया जा रहा है.

इस एक्ट के तहत सरकार इलाकों को लॉकडाउन कर सकती है. सार्वजनिक परिवहन को आंशिक या पूरी तरह से रोक सकती है. अगर किसी पर महामारी से ग्रसित होने का शक है तो उसका परीक्षण किया जा सकता है. अगर कोई इस कानून को तोड़ता है या फिर इसका उल्लंघन करता है तो उसे आईपीसी की धारा 188 के तहत सजा हो सकती है.

2009 में जब स्वाइन फ्लू फैला था तब पुणे में इस एक्ट का इस्तेमाल किया गया था. 2015 में चंडीगढ़ में डेंगू फैल गया था और तब भी इस एक्ट का इस्तेमाल किया गया था. 2018 में गुजरात के वडोदरा में इस एक्ट का इस्तेमाल तब किया गया था जब हैजा फैल गया था. 1890 के दशक में बंबई में प्लेग फैल गया था तब भी इस एक्ट का इस्तेमाल किया गया था.

ये एक्ट जिलाधिकारियों और स्थानीय सरकारों को काफी ताकत देता है. ये लोग चाहें तो किसी इलाके को पूरी तरह बाकी क्षेत्र से काट सकते हैं. 1890 के दशक में प्लेग फैलने के वक्त ऐसा किया भी गया था लिहाजा इतिहासकार इस एक्ट की आलोचना करते हैं. उस वक्त लाला लाजपत राय ने इस बारे में काफी छापा था लिहाजा उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था.

आपको बता दें कि सरकार ने कोविड-19 को नोटिफाइड डिजास्टर मानने का फैसला लिया है. सरकार अब इसके लिए स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड बनाने जा रही है. इसमें 75 प्रतिशत पैसा केंद्र सरकार देती है. केंद्र शासित प्रदेशों में 90 प्रतिशत पैसा केंद्र सरकार को देना होता है. इस पैसे का इस्तेमाल इस महामारी से निपटने के लिए किया जाता है.

फिलहाल तक कोरोना वायरस का कोई इलाज तलाश नहीं किया जा सका है. इससे बचने का एक ही तरीका है और वो है सोशल डिस्टेंसिंग. यानि लोग एक दूसरे से दूरी बनाएं रखें. मिलें जुलें नहीं, पार्टियां या गेट टुगैदर नहीं करें. कहीं घूमने नहीं जाएं. घर पर ही रहें और साफ सफाई का ध्यान रखें. याद रखिएगा कि बचाव की इलाज है.