वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2020: भारत से कम हो रही खुशी, हर साल घट रही रैंक

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Sustainable Development Solution Network यानि SDSN ने वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2020 जारी की है. इसके लिए डेटा 2018 और 2019 में लिया गया था लिहाजा हालिया वैश्विक उथल पुथल का इस पर कोई असर नहीं है. इस रिपोर्ट में 153 देशों को शामिल किया गया था और भारत इस लिस्ट में 144वें नंबर पर है.

इस लिस्ट के मुताबिक फिनलैंड इस सूची में नंबर वन पर है वहीं दूसरे नंबर पर डेनमार्क और तीसरे नंबर पर स्विट्जरलैंड है. भारत इस लिस्ट में 4 पायदान खिसक कर 144वें नंबर पर आ गया है. इस लिस्ट के हिसाब से भारत की स्थिति अपने पड़ोसी देशों नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और चीन से भी खराब है. दुनिया के टॉप -10 खुशहाल देश यूरोप के हैं, वही यूरोप जो फिलहाल कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित है.

आपको बता दें कि इस लिस्ट में सबसे नीचे स्थान पाने वाले देश हिंसा और गरीबी से पीड़ित हैं. ज़िम्बावे, दक्षिणी सूडान और अफगानिस्तान को दुनिया के सबसे कम खुशहाल देशों में जगह दी गई है. दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक होने के बावजूद, अमेरिका खुशहाली के मामले में 18 वें स्थान पर है. वार्षिक विश्व खुशहाली रिपोर्ट दुनिया के 156 देशों को इस आधार पर रैंक करती है कि उसके नागरिक खुद को कितना खुश महसूस करते हैं.

20 मार्च को विश्व खुशहाली दिवस पर ये रिपोर्ट जारी की गई है. साल 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 मार्च को विश्व खुशहाली दिवस घोषित किया था. आपको बता दें कि इस रिपोर्ट को बनाने के लिए खुशी के स्तर को 6 तरह के मापा गया है. इसमें प्रति व्यक्ति आय, स्वस्थ जीवन, सामाजिक सपोर्ट, आजादी, विश्वास और उदारता, भ्रष्टाचार को लेकर आम लोगों की सोच शामिल हैं.

साल 2019 की खुशहाली रिपोर्ट में भी भारत को पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित अपने अन्य पड़ोसी देशों से भी नीचे स्थान मिला था. 2019 में भारत सात पायदान फिसल कर 140वें स्थान पर पहुंच गया था. उससे पहले 2018 में भारत 133वें स्थान पर था जबकि 2017 में 122वें और 2016 में 118वें पायदान पर था. इस रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में चिंता, उदासी और क्रोध सहित नकारात्मक भावनाओं में वृद्धि हुई है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां लोगों में अपनेपन का अहसास होता है, एक-दूसरे पर भरोसा होता है और वे साझा संस्थानों का आनंद लेते हैं, ऐसे देश खुशहाल होते हैं. इन राष्ट्रों में अधिक सहनशीलता होती है, क्योंकि साझा-विश्वास कठिनाइयों के बोझ को कम करता है तथा स्वस्थ समाज का निर्माण करता है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर आर्थिक क्रियाओं के केंद्र यानि इकोनॉमिक पावरहाउस होते हैं. शहरों की भी एक लिस्ट जारी की गई है जिसमें दिल्ली 180वें नंबर पर है.

खुश क्यों नहीं हैं भारत के लोग?

अब इस पर विस्तार से चर्चा की जा सकती है कि आखिर भारत के लोग खुश क्यों नहीं हैं? क्यों समाज में दूरियां बढ़ रही हैं और क्यों लोगों में नकारात्मक भावनाएं पनप रही हैं. उम्मीद है कि सरकार इस रिपोर्ट पर गौर करेगी और देश के लोगों से दूर हो रही खुशी को लौटाने के लिए कोशिशें करेगी. सरकार को देखना पड़ेगा कि और ऐसे हालात पैदा करने होंगे कि लोग एक दूसरे की मदद के लिए आगे आएं और एक बेहतर व खुश समाज का निर्माण करें.