सुदीक्षा भाटी: अपनी मेहनत के दम पर 4 करोड़ की स्कॉलरशिप पाने वाली बेटी

सुदीक्षा भाटी, ग्रेटर नोएडा के दादरी की रहने वाली थीं. उनके पिता एक चाय की दूकान चलाते हैं और सुदीक्षा ने बड़ी मेहनत के बल पर एचसीएल द्वारा संचालित स्कूल में एडमिशन लिया था. सुदीक्षा को स्कॉलरशिप मिली और पढ़ने के लिए वो अमेरिका चली गई. इस खबर को देश की मीडिया ने भी खूब दिखाया था. आस पास के गांवों में सुदीक्षा के परिवार का नाम हो गया. सुदीक्षा हाल ही में वापस लौटी थी ताकि परिवार से मिल पाए. 20 अगस्त को उसे वापस लौटना था लेकिन इससे पहले ही उसके साथ हादसा हो गया.

सुदीक्षा के चाचा का कहना है कि वो उनके साथ बाइक पर थीं और किसी काम से बुलंदशहर के एक गांव में गए थे. वहीं सुदीक्षा के भाई का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वह बता रहे हैं कि सुदीक्षा उनके साथ मामा के घर गई थीं. दोनों बातों में एक बात कॉमन है और वो ये कि एक बुलेट मोटरसाइकिल जिसकी नंबर प्लेट पर जाट लिखा हुआ था उससे इनकी टक्कर हो गई. टक्कर होते ही सुदीक्षा गिर गई और उनकी मृत्यु हो गई.

पुलिस अभी तक नहीं पता कर पाई है कि वो मोटरसाइकिल किसकी थी जिसकी नंबर प्लेट पर जाट लिखा हुआ था. पुलिस को अभी ये भी नहीं पता कि उस मोटरसाइकिल को कौन चला रहा था. पुलिस का कहना है कि सुदीक्षा और उनके भाई ने हेलमेट नहीं पहना था, साथ ही नाबालिग भाई बाइक चला रहा था. जिलाधिकारी ने अपनी बाइट में बार बार यह तो कहा कि चाचा बाइक नहीं चला रहे थे और ये सड़क दुर्घटना है लेकिन जब उनसे एफआईआर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने एसपी सिटी से जानकारी लेने को कहा.

बाइटों के दौरान पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों का फोकस इस बात पर रहा कि सुदीक्षा गौतमबुद्धनगर की रहने वाली थीं और मामला सड़क दुर्घटना का है. सुदीक्षा अमेरिका में करीब 4 करोड़ की स्कॉलरशिप पर पढ़ रही थीं. ये जानकारी होने पर मीडिया की भीड़ मौके पर हो गई.  ट्विटर पर मामला ट्रेंड करने लगा. सुदीक्षा भाटी का नाम यूट्यूब से लेकर गूगल तक पर सर्च किया जाने लगा.

इस दौरान बीएसपी सुप्रीमो मायावती, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर ने इस मामले को ट्विटर पर उठाया. कांग्रेस, बीएसपी समेत सभी विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने इस मुद्दे पर ट्वीट करने शुरू कर दिए. पत्रकारों ने फोटो, वीडियो शेयर करने शुरू कर दिए और देखते ही देखते ये मामले ट्रेंडिग में आ गया.

पुलिस और प्रशासन अपना काम कर रहे हैं और विपक्ष भी अपनी भूमिका निभा रहा है. इस सबके बीच देश ने एक होनहार छात्रा को खो दिया है. एक ऐसी स्टुडेंट को खो दिया है जो देहात की मिट्टी से निकली थी और सूबे तथा देश का नाम रौशन कर रही थी.

ऐसा नहीं है कि छेड़खानी का ये कोई पहला मामला हो. गूगल पर ‘उत्तर प्रदेश छेड़खानी’ टाइप करते ही एक लाख से अधिक रिजल्ट सामने आ जाते हैं. गूगल समाचार में यही सर्च करने पर 50 हजार से अधिक नतीजे सामने आ जाते हैं. हर मामले में पुलिस का जवाब एक ही होता है और वो ये कि विधिक कार्रवाई की जाएगी लेकिन सवाल तो ये है कि आखिर कैसे बेटियां सुरक्षित महसूस करेंगी?

एनसीआरबी के आंकडों के आधार पर एक हिन्दी दैनिक की खबर के मुताबिक 2018 में देशभर में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 3 लाख 78 हजार 277 मामले दर्ज किए गए थे. इसमें सबसे ज्यादा 59 हजार 445 मामले अकेले यूपी में दर्ज हुए थे. 2018 में देशभर में महिलाओं के खिलाफ अपराध के जितने मामले दर्ज हुए थे, उसमें से 15.7% मामले यूपी में सामने आए थे.

खबर में आगे ये भी बताया गया कि बलात्कार के मामलों में यूपी तीसरे नंबर पर था. 2018 में बलात्कार के सबसे ज्यादा 5 हजार 433 मामले मध्य प्रदेश में और उसके बाद 4 हजार 335 मामले राजस्थान में दर्ज हुए थे. जबकि, यूपी में 3 हजार 946 मामले आए थे. इतना ही नहीं, बलात्कार की कोशिश के मामलों में यूपी पहले नंबर पर था. देशभर में 4 हजार 97 बलात्कार की कोशिश के मामले रिकॉर्ड हुए थे, इसमें से सबसे ज्यादा 661 मामले यूपी में दर्ज हुए थे.

साफ है कि राज्य में पुलिस जो कुछ भी कर रही है वो काफी नहीं है और ऐसे सार्थक प्रयास करने होंगे जिनसे महिला आबादी खुद को सुरक्षित महसूस करे. जहां तक बात सुदीक्षा भाटी की है इस मामले में तत्काल जांच की जरूरत है और ये मामला दो जिलों के बीच ना फंसे इसको लेकर भी आला अधिकारियों को दखल देना चाहिए.