यूपी सरकार के सामने हैं ये 5 चुनौतियां, अगर चूकी तो 2022 में होगी परेशानी

yogi adityanath
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यूपी में फिलहाल बीजेपी सत्ता में है और योगी आदित्यनाथ सूबे के मुख्यमंत्री हैं. योगी आदित्यनाथ की छवि एक कड़क प्रशासक की है और ऐसा कहा जाता है कि वो कठोर फैसले लेने से परहेज नहीं करते हैं. इसके बाद भी कुछ चुनौतियां ऐसी हैं, हाल फिलहाल में जिनका सामना उनकी सरकार को करना पड़ रहा है. अगला विधानसभा चुनाव 2022 में होना है और विपक्षी दल इन्हीं चुनौतियों को मुद्दा बनाएंगे वहीं सरकार की भी कोशिश है कि इन चुनौतियों को वक्त रहते ही निपटा लिया जाए ताकि चुनाव के वक्त में जनता को सफलता की कहानी सुनाई जा सके.

योगी सरकार के सामने इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश में बढ़ रही आपराधिक घटनाओं की है. चाहे वो हाल फिलहाल का विकास दुबे कांड हो या फिर कुछ वक्त पहले लखनऊ में एपल के मैनेजर की हत्या का कांड हो. चाहे बुलंदशहर में इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या का मामला हो या फिर उन्नाव और शाहजहांपुर कांड. NCRB के आंकडे विपक्षी दलों को सरकार पर निशाना साधने का मौका दे रहे हैं. सरकार और प्रशासन चाहे इन आंकडों का जितना बचाव करे लेकिन सच्चाई यही है कि प्रदेश में अपराध पर लगाम नहीं लग पा रही है.

बहुत वक्त नहीं हुआ जब यूपी सरकार ने यूपी पुलिस हाथ खोल देने का दावा किया था और इसी के बाद से प्रदेश में एनकाउंटर होने लगे थे. अपराधी तख्ती पकड़कर थाने पहुंचने लगे थे. ऐसा लग रहा था कि मानो प्रदेश में अपराध खत्म हो गया है लेकिन आज जब अखबारों पर नजर डाली जाती है तो तमाम पन्ने अपराध की खबरों से भरे दिखाई देते हैं. ये सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है और यदि सरकार इस चुनौती से पार नहीं पा सकी तो 2022 में यही सबसे बड़ा मुद्दा होने वाला है.

अब बात करते हैं अर्थव्यवस्था की. इसके लिए सरकार ने तमाम प्रयास किए हैं चाहे हाल ही में लघु और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना हो या फिर मध्यम उद्योगों की सहारा देना हो, सरकार अपनी ओर से कोशिशेें करती दिख रही है. इससे पहले भी वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट की योजना सरकार ने उतारी थी जिस पर काफी मेहनत भी की गई थी. साल 2018 और 2019 में प्रदेश में भारी भरकम निवेश हुआ, ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी हुईं और डिफेंस कॉरिडोर का भी निर्माण हुआ. इस सबके बावजूद भी सूबे में वो चमक नहीं दिख पा रही जो इतने काम के बाद दिखनी चाहिए थी. ये भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती है और इस मुद्दे को लेकर भी सरकार विपक्ष के निशाने पर है.

अगली जो चुनौती सरकार के सामने है वो है रोजगार. 2022 के चुनावों में ये बहुत बड़ा मुद्दा होने वाला है और समाजवादी पार्टी व कांग्रेस ने अभी से इस मुद्दे को उठाना शुरू भी कर दिया है. ऐसा नहीं है कि सरकार ने इस दिशा में काम नहीं किया या फिर सरकार असफल रही लेकिन ये जितना बेहतर हो सकता था उतना अभी नहीं हुआ है. प्रदेश से युवाओं का पलायन एक बड़ी समस्या है. साथ ही लखनऊ समेत अन्य महानगरों में भी नौकरियों की समस्या देखने को मिलती है. कुछ वक्त पहले सीएम योगी ने कहा था कि सरकारी नौकरी के लिए काबिल लोग नहीं मिल पाते, ये बात कुछ हद तक ठीक भी है लेकिन युवाओं को उनकी काबिलियत के हिसाब से रोजगार मिलना चाहिए ये भी जरूरी है.

अगली चुनौती जो सरकार के सामने है वो है मूलभूत समस्याएं यानि सेहत, शिक्षा, संचार और यातायात आदि. प्रदेश भर में सड़कों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. खास तौर पर नगर निगम और नगर पालिका के जरिए बनने वाली सड़कें एक बारिश भी नहीं झेल पाती हैं. सरकारी अस्पताल में आदमी मजबूरी में जाता है और सरकारी स्कूल पर उसे भरोसा नहीं है. हालांकि ये बात केवल यूपी की ही नहीं है बल्कि हर प्रदेश की है. बात यूपी की करें तो हाइवे अपनी रफ्तार पकड़ रहे हैं लेकिन मूलभूत सुविधाएं सरकारी सिस्टम में फंसी हुई ही दिखाई देती हैं और इसके लिए सरकार को तुरंत कड़े कदम उठाने चाहिए.

पांचवीं जो चुनौती सरकार के सामने है वो है कोरोना वायरस. यूपी के काम की तारीफ हर कहीं हो रही है और हम भी यहीं कहेंगे कि इसको लेकर सरकार ने काफी काम किया है लेकिन अभी भी धरातल पर और मजबूत काम किए जाने की जरूरत है. प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी पर काफी हद तक सरकार ने लगाम लगाई है लेकिन इस कारण लोगों को सामान्य बुखार तक की दवाई नहीं मिल पा रही है. सेनेटाइजेशन का काम और तेजी से किए जाने की आवश्यकता है साथ ही सरकारी मशीनरी को थोड़ा और मानवीय होने की जरूरत है.

ये सभी चुनौतियां इस वक्त सरकार के सामने हैं और 2022 में ये मुद्दे बनने वाले हैं. देखना होगा कि सरकार इन चुनौतियों से कैसे निपट पाएगी.