क्या वाकई भूख के कारण घास खा रहे हैं लोग, जानिए इस खबर की सच्चाई

कोरोना वायरस लगातार फैल रहा है और इस वायरस से लड़ने के लिए देश लॉकडाउन पर है. इस बीच कई कहानियां निकल कर सामने आ रही हैं. शहरी इलाकों की खबरें तो लोगों तक पहुंच जाती हैं लेकिन गांव के हालात शायद ही सामने आ पाते हैं. ऐसी ही एक खबर सामने आई है वाराणसी से. वही वाराणसी जहां से खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सांसद हैं.

इस खबर में दावा किया गया है कि कुछ इलाकों में खाने की उपलब्धता नहीं है और यहां रहने वाले लोग घास खाने पर मजबूर हैं. इस खबर का असली सच भी हम आपको बताएंगे लेकिन उससे पहले आप ये जान लीजिए कि इस खबर में और क्या क्या कहा गया है. इस खबर में साफ साफ लिखा है कि पिछले तीन दिनों से इस बस्ती में चूल्हे नहीं जले हैं और लोग फाकाकशी को मजबूर हैं.

इस खबर में दावा किया गया है कि यहां रहने वाले लोगों के पास सैनेटाइजर और मास्क तो छोड़िए, हाथ धोने के लिए साबुन तक नहीं है. दावा है कि जनता कर्फ्यू के दिन भी इन लोगों को खाना नहीं मिला था. पड़ोस के एक गांव में तेरहवीं हुई थी और उसके यहां की बची हुई सूखी पूड़ियां खाकर ये लोग जिंदा रह पाए. खबर में दावा किया गया है कि अब ये लोग खेतों में बचे आलू खाकर जिंदा हैं.

इस खबर को एक बड़े अखबार की वेबसाइट पर भी जगह मिली है. इस वेबसाइट पर छपा है कि वाराणसी के बड़ागांव ब्लाक के कोइरीपुर गांव में चार दिन से भूखे वनवासी बच्चे अंकरी घास व नमक खा रहे हैं. हालांकि खबर में ये भी बताया गया है कि ये जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आ गए. एसडीएम पिंडरा के निर्देश पर बड़ागांव थानाध्यक्ष और ग्राम प्रधान ने वनवासी परिवारों को 10-10 किलो चावल, 2-2 किलो दाल और अन्य सामान दिया. ग्राम प्रधान ने कहा कि वनवासी बस्ती में राशन की कमी नहीं होने दी जाएगी.

इस खबर को और भी वेबसाइटों ने छापा है. हर जगह कहानी एक ही है. दावा यही है कि गांव के लोग घास खाकर जिंदा हैं. इस दावे की सोशल मीडिया पर चर्चा हुई तो यूपी में प्रमुख विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी ने भी एक करारा ट्वीट कर दिया.

इस ट्वीट को करीब 1600 बार रिट्वीट किया गया. एक सवाल सरकार और सिस्टम पर खड़ा हो गया. ऐसे में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार सामने आए. उनके ऑफिस के ट्विटर हैंडल से ये ट्वीट किया गया-

ट्विटर पर जारी इस विवाद के बाद AMN न्यूज़ ने वाराणसी के अपने सूत्रों से बातें कीं और सच जानने की कोशिशें कीं. पता चला कि गांव के लोगों द्वारा चने की बालियां और अखरी दाल खाना कोई नई बात नहीं है. दूसरी बात जो हमें पता चली वो ये कि हालात भुखमरी के तो कतई नहीं हैं. गांव के लोग और गांव के प्रधान इन लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

हमें बताया गया कि ये जानकारी मिलते ही थाना प्रभारी संजय सिंह खुद मौके पर पहुंचे थे और सभी को राशन दिया. यही नहीं सरकार द्वारा दी जा रही बाकी योजनाओं का भी लाभ इन लोगों को मिले, इस बात को एसडीएम मणिकंडन ए ने सुनिश्चित किया. यही नहीं जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा की एक तस्वीर सामने आई है जिसमें वो अपने बेटे के साथ यही दाल और चने की बालियां खाते दिखाई दिए.

अब आपको बताते हैं कि यूपी सरकार ने गरीब लोगों के लिए क्या इंतजाम किए हैं. उन लोगों के लिए क्या इंतजाम किए हैं जो रोज कमाते, रोज खाते हैं. सीएम योगी ने काफी पहले ही इस वायरस की गंभीरता को समझ लिया था और प्लानिंग भी शुरू कर दी थी. हमने तब भी आप लोगों को इस बारे में बताया था.

आपको बता दें कि सरकार ने एक करोड़ 65 लाख लोगों को एक महीने के निशुल्क राशन की व्यवस्था की है. यही नहीं ऐसे लोग जिनके पास राशन कार्ड नहीं है उन्हें 1000 रुपये महीने की व्यवस्था की गई है. 20 लाख 37 हजार मजदूरों को 1000 रुपये महीने की व्यवस्था की गई है ताकि खाने पीने की किसी को कोई दिक्कत ना हो. कम्युनिटी किचन से खाने पीने की व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं और ऐसे लोग जो अभी भी अपने घरों को जा रहे हैं उनके लिए भी खाने पीने की व्यवस्थाएं की जा रही हैं.

आपको बता दें कि 12 हजार से अधिक वाहन सब्जी, दूध, दवा और खाना घर घर तक पहुंचाने के लिए लगाए गए हैं. बिजली बिल के ऑनलाइन भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा. आपको बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस वक्त 18 घंटे तक काम कर रहे हैं और अधिकारियों से पल पल की खबर ले रहे हैं. जब सरकार इतना कुछ कर रही है तब ऐसे में नागरिकों की भी जिम्मेदारी है कि वो घरों में रहें ताकि कोरोना वायरस उन्हें छू नहीं पाए.