गाजियाबाद: पत्रकार के परिवार को 10 लाख की आर्थिक मदद, पत्नी को नौकरी

गाजियाबाद के पत्रकार विक्रम जोशी की हत्या का मामला अब बेहद तूल पकड़ चुका है. इस मामले की गूंज अब पूरे यूपी में सुनी जा रही है. इस मामले को लेकर पत्रकार बिरादरी की नाराजगी भी साफ तौर पर देखी जा सकती है हालांकि अब इस मामले में पुलिस और प्रशासन सही मायनों में कार्रवाई करते हुए दिखाई दे रहे हैं. पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और  एक अवैध हथियार भी बरामद किया जा चुका है.

एसएसपी कलानिधि नैथानी ने कहा कि परिवार ने छेड़खानी की शिकायत की थी लेकिन उस पर कार्रवाई वक्त रहते चौकी की तरफ से नहीं की गई. इस कारण चौकी प्रभारी को भी निलंबित कर दिया गया है.

इस मामले में जिलाधिकारी अजय शंकर पांडे ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार के लिए 10 लाख रुपये और जोशी की पत्नी के लिए सरकारी नौकरी की घोषणा की है. प्रशासन पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है.

इस मामले में पत्रकारों का भी गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है. पत्रकारों ने इस मामले को लेकर धरना प्रदर्शन भी किया और अपनी नाराजगी जाहिर की. आपको बता दें कि पीड़ित परिवार ने कहा है कि जब तक सभी अपराधी गिरफ्तार नहीं हो जाते वे लोग शव को नहीं लेंगे.

आपको बता दें कि गाजियाबाद के पत्रकार विक्रम जोशी को उस वक्त गोली मार दी गई थी जब वो अपनी बेटियों के साथ जा रहे थे. उनको बदमाशों ने घेर लिया था, मारपीट की थी और फिर गोली मार दी थी. गोली विक्रम के सिर में लगी थी. घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनको बचाया नहीं जा सका.

बताया जा रहा है कि विक्रम की भान्जी के साथ कुछ बदमाश छेड़खानी करते थे. विक्रम ने इसको लेकर विरोध जाहिर किया और पुलिस में शिकायत भी की. इसी शिकायत के बाद से आरोपी उनके साथ रंजिश मानने लगे थे. मौका देख कर अपराधियों ने विक्रम को घेर लिया और गोली मार दी.

इस केस को लेकर गाजियाबाद से लखनऊ तक सनसनी फैल गई. पुलिस के आला अधिकारी भी हरकत में आ गए. पुलिस प्रशासन के बड़े अधिकारियों ने गाजियाबाद के अधिकारियों से पूरी डिटेल ली और सीएम को भी मामले की जानकारी दी.

इस मामले को लेकर विपक्ष ने भी यूपी सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्विटर पर सरकार को घेरा तो वहीं बसपा की अध्यक्ष मायावती ने भी इस घटना को लेकर नाराजगी जाहिर की.

हालात की गंभीरता को समझते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी थी. 9 आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए और बचे आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगा दी गईं. वहीं पीड़ित परिवार को 10 लाख की सहायता राशि और नौकरी की भी व्यवस्था प्रशासन की ओर से की गई.

लेकिन बड़ा सवाल तो यही है कि आखिर बदमाश इतना बेखौफ कैसे हैं, क्यों किसी की हत्या से पहले कुछ सोच नहीं रहे हैं. अपराधियों को इतनी हिम्मत मिल कहां से रही है. पुलिस को अपराधियों का चक्रव्यूह तोड़ना होगा और प्रदेश को अपराध के चंगुल से बाहर निकालना होगा तभी जनता खुली हवा में सांस ले पाएगी.