कोरोनासुर का अंत करने के लिए देवी बनीं ये महिलाएं, जानिए इनकी कहानी

कोरोना वायरस के खौफ के कारण लोग घरों में बंद हैं. देश भर में लॉकडाउन लागू है. ऐसे में डॉक्टर, जरूरी सेवाओं से जुड़े लोग और पुलिसवाले बिना अपनी जान की चिंता किए दिन और रात काम कर रहे हैं. कई पुलिसवाले ऐसे हैं जो रोजाना गरीबों को, मजदूरों को खाना खिला रहे हैं और अपनी ड्यूटी भी कर रहे हैं.

जालौन की महिला थानाध्यक्ष नीलेश कुमारी इन दिनों कोरोना फाइटर्स का नया चेहरा बन कर उभरी हैं. देश भर में मजदूरों का पलायन जारी है और दिहाड़ी पर काम करने वाले ये लोग भूखे प्यासे अपने शहरों, गावों की ओर जा रहे हैं. हालांकि सरकारों ने इनके लिए काफी कुछ किया है लेकिन फिर भी तत्काल राहत के लिए जो काम पुलिसवाले कर रहे वैसी मिसाल शायद ही देखने को मिले.

उरई के महिला थाना की प्रभारी नीलेश कपमारी अपने स्टाफ के साथ गरीबों को खाना खिलाने की मुहिम में जुटी हैं. महिला थाने के सिपाही और कर्मचारी भी उनका सहयोग कर रहे हैं. दरअसल जब उन्होंने भूख प्यास से बेहाल लोगों को देखा तो उनकी आखों से भी आंसू निकल आए. आखिर पुलिस की वर्दी के पीछे भी इंसान ही होते हैं. नीलेश ने अपने पैसों से खाना खिलाने की तैयारियां शुरू कर दीं.

जब उनके स्टाफ ने उन्हें देखा तो सहयोग शुरू कर दिया. बस फिर क्या था. सभी ने अपनी सैलेरी के पैसों से खाने का इंतजाम किया और अब सैंकडों लंच के पैकेट रोजाना बांटे जा रहे हैं. इन पैकेट को लेकर नीलेश अपने सहयोगियों के साथ खुद निकलती हैं और दिहाड़ी मजदूरों, गरीबों को खाना बांटती हैं. उनकी इस मुहिम को जो भी देख रहा है, तारीफ कर रहा है.

पुणे की इस महिला वायरोलॉजिस्ट ने किया कमाल

अब आपको एक और खबर बताते हैं. ये खबर पुणे से है जहां एर महिला वायरोलॉजिस्ट ने बड़ा कारनामा किया है. इस इस महिला वायरोलॉजिस्ट ने अपने बच्चे को जन्म देने से महज़ कुछ घंटे पहले तक लगातार काम करके कोरोना टेस्ट किट तैयार की है.

पुणे की मायलैब डिस्कवरी भारत की पहली ऐसी फर्म है जिसे टेस्टिंग किट तैयार करने और उसकी बिक्री करने की अनुमति मिली है. इस किट की कीमत 1200 रुपये है. जो किट विदेश से मंगाई जाती है उसकी कीमत 4500 रुपये है. ऐसे में ये नई किट काफी किफायती है.

मायलैब डिस्कवरी की वायरोलॉजिस्ट मीनल भोसले ने अपनी टीम के साथ मिल कर इस किट को बनाया है. मात्र छह हफ्ते में बनी ये किट कोरोना वायरस संक्रमण की जांच ढाई घंटे में कर लेती है, जबकि विदेश से आने वाले किट से जांच में छह-सात घंटे लगते हैं.

जिस वक्त मीनल इस किट पर काम कर रही थीं उस वक्त वो प्रेगनेंट थीं और डिलीवरी से कुछ घंटे पहले तक भी उन्होंने इस किट पर काम किया.

वाराणसी की इन वैज्ञानिकों ने भी किया बहुत बड़ा काम

अब बात वाराणसी की महिला वैज्ञानिक डॉ. गीता राय और उनकी टीम की. डॉक्टर गीता ने भी अपनी टीम के साथ मिलकर कोरोना टेस्ट किट बनाई है और इसके पेटेंट के लिए भी अप्लाई कर दिया है. दावा है कि ये किट मात्र एक घंटे में कोरोना की रिपोर्ट दे देगी.

उन्होंने मीडिया को बताया कि ये किट गांव देहात में भी काम करेगी और इसके लिए महंगी मशीनों की कोई जरूरत नहीं होगी. बताया जा रहा है कि बहुत जल्द ये किट बाजार में आने वाली है.

नवरात्रि चल रही है और ऐसे में हमारे देश की महिलाएं देवी का रूप लेकर कोरोना के संहार में अपने अपने तरीके से लगी हुई हैं. आप लोग भी इनकी कहानी घर घर पहुंचा कर इनके काम को सलाम कर सकते हैं. आपका एक शेयर हजारों को प्रेरित कर सकता है.