Fact Check: क्या दुनिया में चीन ने फैलाया कोरोना वायरस? जानें सच्चाई

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जब हम इस वीडियो को बना रहे हैं तब तक दुनिया भर में 34 हजार लोग कोरोना वायरस के कारण मर चुके हैं और सात लाख से अधिक लोग इस वायरस से पीड़ित हैं. पूरी दुनिया के लाखों लोग इस बात को मान रहे हैं कि इस वायरस के फैलने के पीछे चीन का हाथ है और चीन इसको लेकर कई चीजें दुनिया भर से छुपा रहा है. लेकिन क्या वाकई ऐसा कुछ है? क्या चीन वाकई कुछ छुपा रहा है? या फिर चीन भी बाकी देशों की तरह इस वायरस का शिकार है? चलिए जानने की कोशिश करते हैं.

चीन में जो लोग कोरोना वायरस के कारण मारे गए थे, उनकी संख्या 3,304 बताई गई थी लेकिन क्या ये आंकडा ठीक है? हाल ही में जब मृतकों के परिवारों को अस्थि कलश सौंपे गए तो 5000 से अधिक परिवारों को अस्थिकलश दिए गए. अब ये तस्वीरें इंटरनेट पर वायरल हो रही हैं.

एक अन्य खबर के मुताबिक चीन में 42000 लोगों की मौत हुई है. इस खबर में दावा किया गया है कि 3500 अस्थिकलश रोजाना मृतकों के परिवारों को दिए जा रहे हैं और 12 दिनों तक दिए जाएंगे. इस हिसाब से 42000 लोग कोरोना वायरस के कारण मारे गए हैं.

एक और खबर है जिसमें दावा किया गया है कि चीन में दो करोड़ मोबाइल फोन स्विच ऑफ हो गए हैं. यही नहीं 8 लाख 40 हज़ार लैंडलाइन फोन भी बंद हो गए हैं. इस तरह की खबरों में बताया गया है कि चीन में मौत का आंकडा चाहे जो हो लेकिन सच्चाई इससे कई गुना अधिक भयावह है.

चीन ने दुनिया पर किया कोरोना अटैक?

क्या चीन ने दुनिया के खिलाफ कोरोना नाम के हथियार का इस्तेमाल किया है? क्या चीन ने इस बायोलोजिकल वेपन को बनाया है? दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इसे सच मान रहा है और कोरोना वायरस को चीनी वायरस कह रहा है.

कुछ खबरों और सोशल मीडिया पर जारी मैसेज में ऐसा दावा किया जा रहा है कि चीन ने अपने व्यापार को बढ़ाने और पूरी दुनिया की कमर तोड़ने के लिए ये वायरस छोड़ा है. इस बात को इस तथ्य से जोड़ा जा रहा है कि चीन अब मास्क और सेनेटाइजर के साथ साथ वेंटीलेटर की सप्लाई भी दुनिया भर में करने लगा है.

यही नहीं चीन ने कोरोना वायरस की वैक्सीन भी तलाश कर ली है और दावा किया जा रहा है कि ये वैक्सीन 95 फीसदी से लेकर 99 फीसदी तक कोरोना को खत्म कर देने में सक्षम है. अब ये दावा किया जा रहा है कि ये वैक्सीन पहले ही तलाश की जा चुकी थी और अब चीन इससे मुनाफा कमाने की जुगत में है.

चीन की लैब में बना हथियार है कोरोना वायरस?

चीन के वुहान में एक लैब है जो बहुत ही ऊंचे दर्जे वाली लैब है. दावा किया जा रहा है कि इसी लैब में कोरोना वायरस को बनाया गया था. ली वेनलियांग पहले डॉक्टर थे जिन्होंने कोरोना के खतरे से दुनिया को सावधान किया था. लोगों ने इसे नजरअंदाज किया और चीन के सरकारी सिस्टम ने डॉक्टर को बहुत परेशान भी किया. आखिरकार कोरोना वायरस से ही ली वेनलियांग की मौत हो गई.

सोशल मीडिया पर ऐसी खबरों की कमी नहीं है जिनमें दावा किया गया है कि वुहान की इस हाई स्टैंडर्ड लैब में ही कोरोना वायरस को बनाया गया था. इसी लैब से निकल कर ये वायरस इंसानों में पहुंच गया. हालांकि सच्चाई क्या है कोई नहीं जानता और कोई मीडिया संस्थान इस दावे की पुष्टि भी नहीं कर सकता.

चीन में दोबारा फुल स्पीड से काम हुआ शुरू

एक और कारण है जिससे चीन पर दुनिया का शक बढ़ रहा है और वो ये कि चीन में दोबारा फुल स्पीड से काम शुरू हो गया है. चीन के वुहान और हुबेई इलाके में बंद की गई फैक्टरियों में दोबारा लोग पहुंचने लगे हैं और चीजों का उत्पादन शुरू कर दिया गया है.

जहां अमेरिका, स्पेन और इटली समेत पूरी दुनिया कोरोना से कांप रही है वहीं चीन ने इतने कम वक्त में ना केवल कोरोना पर काबू पा लिया बल्कि वहां कल कारखाने भी दोबारा शुरू कर दिए गए. अब लोग इसे चीन की बिजनेस स्ट्रेटजी कह रहे हैं.

आखिर क्या है इन तमाम दावों और खबरों की सच्चाई

चीन को भी जोरदार झटका लगा है, उसके भी लोग मरे हैं और वहां भी आर्थिक नुकसान हुआ है. लेकिन जो तथ्य सामने आ रहे हैं वो चौंकाने वाले तो हैं ही. चीन में मीडिया स्वतंत्र नहीं है लिहाजा वहां से आने वाली खबरों पर भी भरोसा नहीं किया जा सकता है. फिलहाल जब तक कुछ सॉलिड फैक्ट हाथ में ना हों तब तक चीन को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है.