बेमौसम की बारिश किसी के लिए रोमांटिक तो किसी के लिए दर्द बन जाती है

गुरूवार की सुबह में लखनऊ का आसमान साफ था लेकिन जैसे जैसे दोपहर का वक्त नजदीक आने लगा, आसमान में बादल छाने लगे और फिर अचानक बारिश शुरू हो गई. शहर जैसे थम सा गया. सड़कों पर सफर करने वाले लोग छुपने के लिए कोई जगह तलाशने लगे. इतने में ओले पड़ने भी शुरू हो गए.

देखते ही देखते शहर की सड़कों पर मानो सफेद चादर सी बिछ गई. गाड़ियो से चलने वाले लोगों ने भी गाड़ियों को पेड़ों के नीचे करना ही ठीक समझा. तेज बारिश और ओलावृष्टि करीब एक घंटे तक होती रही. इस दौरान सड़कों पर आवाजाही बंद ही रही. जब बारिश और ओले गिरने बंद हुए तो मंजर बदला हुआ था.

सड़कों पर पेड़ों के पत्तों का ढेर जमा हो गया था, साथ ही सड़कों पर फिसलन भी बहुत थी. ऐसे में लोग सावधानी बरतते हुए वाहन चला रहे थे. पानी की ठीक से निकासी ना हो पाने के कारण कई इलाकों में जलभराव भी हो गया लेकिन ये कुछ देर ही रहा. हालांकि इस बारिश ने सड़कों पर जाम जरूर लगवा दिया.

जहां कुछ देर पहले सूर्यदेव गर्मी बरसा रहे थे वहां जैसे ठंड का मौसम एक बार फिर लौट आया. तापमान में भारी कमी देखी गई. पेड़ों से पत्ते झड़ गए साथ ही आम के पेड़ों को खासा नुकसान हुआ. तमाम बौर भी ओलों के कहर का शिकार हो गया. ऐसी स्थिति में किसान भी परेशान दिखाई दिए.

ऐसा नहीं है कि केवल आम की फसल को ही नुकसान हुआ. नुकसान बाकी फसलों को भी हुआ. खेतों में खड़ी हर फसल ओलों का शिकार बनी और किसान माथा पकड़ कर देखता रहा. आखिर इस विपदा का सामने वो करता भी तो कैसे. जहां कुछ लोगों के लिए बारिश रोमांटिक रही वहीं कुछ लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई.