प्रियंका गांधी कर पाएंगी यूपी में चमत्कार? 2022 में कांग्रेस को मिलेगी जीत?

यूपी में कांग्रेस और प्रियंका गांधी क्या कोई चमत्कार कर पाएंगे? पिछले लंबे वक्त में यूपी में सपा और बसपा का जलवा रहा है और फिलहाल बीजेपी सत्ता में है. इस वक्त सूबे में कांग्रेस चौथे नंबर की पार्टी के रूप में पहचान रखती है. अब ऐसे में पार्टी को केवल और केवल प्रियंका गांधी से ही उम्मीदें हैं, देखना होगा कि प्रियंका गांधी कौन से ऐसे कदम उठाएंगी कि पार्टी प्रदेश में सरकार बना पाए.

सोशल मीडिया और मीडिया पर छाई हुई हैं प्रियंका

प्रियंका गांधी ना केवल मीडिया की सुर्खियों में रहती हैं बल्कि सोशल मीडिया पर भी खासी चर्चित रहती हैं. उनसे जुड़ी हर बात खबर बनती है और हर ट्वीट डिजिटल मीडिया पर खबर बनाया जाता है. वे अपने ट्वीट्स में सरकार पर निशाना साधती हैं और सवाल खड़े करती हैं.

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कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता भी सोशल मीडिया पर खासे सक्रिय हैं. कांग्रेस के यूपी अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू भी ट्विटर के जरिए अपनी आवाज़ उठाते रहते हैं. प्रियंका गांधी को यूपी समेत पूरे भारत की मीडिया बेहद गंभीरता से लेती है और जब से वे सक्रिय राजनीति में आई हैं तभी से हर तरह के मीडिया संस्थान उनसे जुड़ी खबरें दिखाते रहे हैं.

2019 में नहीं हो पाया था कोई खास फायदा

कांग्रेस को 2019 के लोकसभा चुनाव में कोई खास फायदा नहीं हो पाया था. अमेठी से राहुल गांधी अपनी सीट गवां चुके हैं और केवल रायबरेली से सोनिया गांधी की कांग्रेस की नुमाइंदगी करती हैं. 2017 के विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस को केवल सात सीटों पर सफलता मिली थी.

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अब स्थिति ये है कि रायबरेली से विधायक अदिति सिंह और हरचंदपुर विधायक राकेश सिंह बागी हो चुके हैं. माना जा रहा है कि 2022 में दोनों ही बीजेपी के टिकट पर मैदान में उतर सकते हैं. पिछले लंबे वक्त से पार्टी यूपी में कोई कमाल नहीं कर पाई है और इसलिए विरोधी दल उसे खास गंभीरता से नहीं लेते थे.

लेकिन प्रियंका गांधी के आने से हालात बदल गए हैं और अब एक बार फिर से कांग्रेस को गंभीरता से लिया जा रहा है. वहीं बीजेपी के बड़े नेता उन्हें चुनौती नहीं मानते और उनके वार का जवाब पलटवार से देते हैं.

संगठन और कार्यकर्ताओं को जोड़ना बड़ी चुनौती

प्रियंका गांधी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है संगठन और कार्यकर्ताओं को जोड़ना. इस वक्त पार्टी के पास यूपी में करने के लिए बहुत सारे काम हैं. जिलास्तर पर, विधानसभा स्तर पर अच्छे कार्यकर्ताओं को चुनना और उनके माध्यम से घर-घर तक पहुंच बनाना इस वक्त कांग्रेस की प्राथमिकता में होना चाहिए.

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प्रियंका गांधी जितना बड़ा नाम हैं, कांग्रेस जितनी पुरानी और बड़ी पार्टी है, वैसा जलवा पार्टी का जमीन पर नहीं दिखता है उसका कारण साफ है कि कांग्रेस के नेताओं ने लंबे वक्त से सड़क पर निकलना छोड़ रखा है. हालांकि अब नए प्रदेश अध्यक्ष के आने के बाद से हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं.

2022 में जीत कांग्रेस के लिए कितनी कठिन

सही मायनों में तो कांग्रेस के लिए 2022 में जीत का रास्ता बेहद ही कठिन है. उन्हें लगातार जनता के बीच में जाना होगा और जनता के मुद्दों को उठाना होगा. साथ ही कांग्रेस को अब ट्रोल्स को जवाब देना सीखना होगा. पार्टी के कार्यकर्ताओं को बचाव की तकनीक सीखनी होगी ताकि जब उन्हें तीखे सवालों का सामना करना पड़े तो वो बिना परेशान हुए जवाब दे पाएं.

कांग्रेस की सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी बीजेपी है लेकिन सपा और बसपा से भी उसे टक्कर लेनी होगी. दोनों ही पार्टियों का कैडर बहुत मजबूत है. कांग्रेस किसी भी स्थिति में चौथे नंबर की पार्टी बनी रहना नहीं चाहेगी लेकिन इस ग्राफ को ऊपर करने के लिए या फिर नंबर वन बनने के लिए जितनी मेहनत और मैनेजमेंट की जरूरत है वो फिलहाल नजर नहीं आ पा रहा है.