जानिए भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद से जुड़ी हर खास बात

भारत और नेपाल के बीच इन दिनों एक टेंशन दिखाई दे रही है. और ये टेंशन सीमा विवाद के कारण है. दरअसल हाल ही में लिपुलेख को लेकर विवाद की स्थिति बन गई है. इस लेख में हम आपको लिपुलेख के बारे में तो बताएंगे ही, साथ में कालापानी विवाद और सुस्ता विवाद के बारे में भी बताएंगे. साथ में ये भी बताएंगे कि नेपाल की इस नाराजगी के पीछे असली कारण क्या है.

  1. लिपुलेख विवाद क्या है?

सबसे पहले बात लिपुलेख विवाद की जो हाल फिलहाल में चर्चा में भी है. लिपुलेख एक छोटा सा क्षेत्र है जिसकी सीमाएं चीन और नेपाल से लगती हैं. इस इलाके को नेपाल अपना हिस्सा बताता है लेकिन भारत के मुताबिक ये इलाका उत्तराखंड के पिथौरागढ़ का है. भारत ने इस इलाके में एक सड़क बनाई है जिसके माध्यम से तीर्थयात्री कैलाश मानसरोवर तक जा पाएंगे. अभी तक ये तीर्थयात्री या तो वाया सिक्किम या फिर वाया काठमांडू कैलाश जाते थे. दोनों ही रास्ते काफी कठिन और काफी महंगे थे. साथ ही दोनों रास्तों का 80 प्रतिशत इलाका चीन का होता था. अब लिपुलेख रास्ते के कारण 84 प्रतिशत रास्ता भारत में होगा जबकि केवल 16 प्रतिशत रास्ता चीन का होगा.

यही रास्ता विवाद की जड़ है. नेपाल का कहना है कि ये रास्ता उसकी जमीन पर बना है लेकिन भारत का कहना है कि ये रास्ता उत्तराखंड के पिथौरागढ़ का है और नेपाल की जमीन पर नहीं बल्कि भारतीय जमीन पर ही है. दरअसल ये सड़क पिछले कई सालों से बनाई जा रही थी लेकिन नेपाल ने कभी इस पर आपत्ति नहीं जताई लेकिन अब अचानक नेपाल इस इलाके को अपना बता रहा है. ऐसा पहली बार नहीं है जब भारत और नेपाल के बीच सीमाओं को लेकर विवाद की स्थिति बनी है. इससे पहले भी ऐसा हो चुका है.

  1. कालापानी विवाद क्या है?

कुछ महीने पहले ही भारत और नेपाल के बीच कालापानी को लेकर विवाद की स्थिति बन गई थी. ये इलाका भी उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में है. नेपाल इस पर अपना दावा जताता रहा है लेकिन इस दावे को कभी साबित नहीं कर पाया. 1962 में जब भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ था तब भारत ने यहां पर चौकी बनाई थी जो अभी तक कायम है. यहां इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस के जवान तैनात हैं. कभी नेपाल ने इस चौकी पर सवाल नहीं किए लेकिन पिछले कुछ वक्त से उसने इस जमीन पर दावा करना शुरू कर दिया है. इसके लिए नेपाल सुगौली संधि याद दिलाता है, ये सुगौली संधि क्या है वो भी आपको बताएंगे लेकिन उससे पहले जानिए नेपाल और भारत के तीसरे सबसे बड़े विवाद के बारे में जो है सुस्ता विवाद.

  1. सुस्ता विवाद क्या है?

बिहार के चंपारण में गंडक नदी दोनों देशों की सीमाएं तय करती रही है. इस इलाके में रहने वाले लोग बताते हैं कि नेपाल ने जबरन इस इलाके पर कब्जा किया हुआ है. इस इलाके में दोनों देशों के मोबाइल सिग्नल आते हैं. इस इलाके को भारत के अपना बताता है और इसके लिए सुबूत भी दिखाता है लेकिन नेपाल इस इलाके पर अपना दावा जताता है. भारत के अधिकारियों ने कई बार इसको लेकर नेपाल के अधिकारियों के साथ बैठकें कीं लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. चलिए अब आपको उस सिगौली संधि के बारे में बताते हैं जिसका हवाला नेपाल बार बार देता रहा है.

  1. जानिए क्या है सिगौली संधि

1815 में ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के बीच एक युद्ध हुआ था जिसके बाद 1816 में संधि की गई थी. इस संधि के मुताबिक नेपाल ने जिन इलाकों पर कब्जा किया है उन्हें छोड़ना होगा और बदले में नेपाल को मिथिला की भूमि मिल जाएगी. इस संधि को सुगौली की संधि कहा जाता है. नेपाल इस संधि की बातें तो करता है लेकिन इसकी कोई कॉपी नेपाल के पास नहीं है जिसमें वर्तमान विवादित इलाके नेपाल के बताए गए हों. नेपाल की विपक्षी पार्टियां भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरती रही हैं.

  1. नए नक्शे से परेशानी क्यों?

अब सवाल ये है कि भारत के नए नक्शे से नेपाल को परेशानी क्यों है. नेपाल भारत से नाराज क्यों है. दोनों ही देशों के बीच बातचीत का रास्ता खुला है लेकिन इतने सालों में नेपाल ने इन मुद्दों को कभी नहीं उठाया. हाल फिलहाल में नेपाल जिस तरह इन मुद्दों को उठा रहा है उससे कई विशेषज्ञ हैरान हैं. उनका मानना है कि इसके पीछे कोई और भी वजह हो सकती है. भारत ने हमेशा नेपाल की मदद की है और दोस्ती निभाई है और नेपाल ने भी ऐसा ही किया है लेकिन अब जो कुछ भी हो रहा है उसे किसी भी तरह ठीक नहीं कहा जा सकता है.

(इस लेख को HNN के संपादक सत्यजीत पवांर ने लिखा है. सत्यजीत पवांर पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबा अनुभव रखते हैं और कई बड़े संस्थानों के साथ काम कर चुके हैं.)